Monday, August 10, 2009

गर्व से कहो


देश की मिटटी की बात ही कुछ और होती है.. जब भी राष्ट्र से संबंधिक कोई बात होती है, तो गर्व से रोम-रोम पुलकित हो उठता है। हमने जिस मिटटी में जनम लिया है, उसकी बात निराली है..और भी कई तथ्य है जो हमे गर्व से ये कहने को प्रेरित करते है कि हम भारतीय हैं

आइये जानें उन तथ्यों को...
:) हम 5000 साल पुरानी सभ्यता का हिस्सा हैं।

:) हमारे देश में सबसे ज्यादा 325 भाषाएं बोली जाती हैं।

:) हमारे देश में 22 आधिकारिक भाषाएं हैं।

:) हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है।

:) हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी हैं।

:) नॉन इंग्लिश स्पीकिंग देशों में सबसे ज्यादा इंग्लिश हमारे देश में ही बोली जाती है।

:) हमारे पास दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सशस्त्र सेना है।

:) हमारे देश में साइंटिस्ट और इंजीनियर्स की विश्व में दूसरी सबसे बड़ी तादाद मौजूद है।

:) हमारा देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेक्टर मैन्युफैक्चरर है।

:) कमर्शियल व्हीकल यानी व्यावसायिक वाहन उत्पादन में हमारा देश दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश है।

:) दुनियाभर 118 एसईआई सीएमएम लेवल-5 कंपनियों में से 70 कंपनियां भारत में स्थित हैं।

:) 5 भारतीय कंपनियों ने टोटल क्वालिटी मैंनेजमेंट के आधार पर दिया जाने वाला कॉरपोरेट सेक्टर का विश्व भर में सबसे नामचीन अवार्ड डेमिंग प्राइज जीता है।

:) भारत विश्व के सात उन देशों में एक है जो अपने उपग्रह स्वयं (बिना किसी अन्य देश की मदद के) अंतरिक्ष में भेजने में सक्षम है।

:) भारत का अंतरिक्ष उपग्रह इनसेट विश्व के सबसे बडे़ डोमेस्टिक सेटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम में एक है।

:) भारत उन तीन देशों में एक है जिन्होंने पूर्णत स्वदेशी सुपर कंप्यूटर बनाया है। बाकी दो देश हैं यूएसए और जापान।

:) भारत के नए परमपद्म टेट्रा स्केल सुपर कंप्यूटर की प्रोसेसिंग क्षमता प्रति सेकेंड एक टि्रलियन है। विश्व में सिर्फ चार देशों के पास ही ऐसे क प्यूटर बनाने की टेक्नोलॉजी है।

:) इंडियन फार्मा (औषधि) इंडस्ट्री विश्व की चौथी सबसे बड़ी फार्मा इंडस्ट्री है।

:) भारत डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग का सबसे बड़ा केन्द्र है।

:) फोर्ब्स पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय वैदिक काल की भाषा संस्कृत अन्य सभी भाषाओं की जननी है और यह कंप्यूटर सॉफ्ट वेयर के लिए भी उपयुक्त है।

:) बिजनेस वीक में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, बहुत तेजी से भारत और विश्वस्तरीय भारतीय इंजीनियर, बिजनेस और मेडिकल ग्रेज्युएट अमेरिका की नई अर्थव्यवस्था को इस कदर प्रभावित करते जा रहे हैं, जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।
:) यूएसए के 38 प्रतिशत डॉक्टर और 12 प्रतिशत वैज्ञानिक भारतीय हैं।

:) माइक्रोसॉफ्ट के 34 और आईबीएम के 28 प्रतिशत कर्मचारी भारतीय हैं।

:) भारत के 250 से अधिक विश्वविद्यालयों, लगभग 1500 रिसर्च और 10,450 उच्च शिक्षा संस्थानों से हर वर्ष 2,00,000 इंजीनियरिंग ग्रेज्युएट और 3,00,000 सामान्य ग्रेज्युएट पास हो कर निकलते हैं।

:) आईआईटी विश्व की उन टॉप तीन संस्थानों में से एक है, जहां से विश्व की सबसे बड़ी कंसल्टिंग फर्म मैकिंस्ले एंड कंपनी सबसे अधिक प्रोफेशनल्स हायर करती है।

:) विश्व के 90 प्रतिशत क प्यूटर्स को चलाने वाला पेंटियम चिप को विनोद डाम नामक भारतीय ने बनाया था।


:) फॉरच्युन 500 कंपनियों में, 100 कंपनियां भारतीय हैं।

:) विश्व के सात आश्चर्यो में एक ताजमहल भारत में है।

:) शतरंज के खेल की शुरुआत सबसे पहले भारत में हुई थी।

:) अंक प्रणाली यानी नंबर सिस्टम की शुरुआत भारत में हुई।

:) शून्य की खोज भारत में हुई, आर्यभट्ट ने शून्य की खोज की थी।

:) भारत में दशमलव प्रणाली की शुरुआत ईसा पूर्व 100 में हो चुकी थी।

:) आर्यभट्ट पहले थे, जिन्होंने सन 499 में यह सिद्ध किया था कि पृथ्वी गोल है। उन्होंने पृथ्वी के व्यास और घूमने की गति की भी सटीक गणना की थी।

:) न्यूटन ने लगभग 400 वर्ष पहले भास्कराचार्य द्वितीय ने गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को स्पष्ट किया था।

:) दुनिया की सबसे पहली यूनिवर्सिटी 800 ई.पू. में भारत के तक्षशिला में बनाई गई थी, जहां दुनिया भर के विद्यार्थी शिक्षा लेने आते थे और वहां तकरीबन 60 विषय पढ़ाए जाते थे।

:) पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर पूरा करने में कितना समय लगता है, इसकी सटीक गणना पांचवीं शताब्दी में भास्कराचार्य ने की थी। उनकी गणना के अनुसार, पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर लगाने के लिए 365.257856474 दिन लगते हैं।

:) चिकित्सा विज्ञान की शुरुआत आयुर्वेद के जरिए लगभग 2500 वर्ष पहले भारत में ही हुई थी। चरक को आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली का जनक कहा जाता है।

:) धनात्मक और ऋणात्मक अंकों और उनकी गणना का सिद्धांत सबसे पहले ब्रह्मगुप्त ने स्पष्ट किया था।

:) बीजगणित, त्रिकोणमिती और कैलकुलस की शुरुआत भारत में हुई थी।

:) पाई के मान की सबसे पहले गणना भारतीय विद्वान बुधयाना ने की थी।

:) पायथागोरस से लगभग 600 वर्ष पहले बुधयाना ने यह सिद्धांत बताया था जिसे हम पाइथागोरस थ्योरम के नाम से जानते हैं।

:) सेफेरिअल गणक पद्धति का जनम भारत में हुआ, पर विकास ग्रीक में हुआ है।

:) नासा ने संस्कृत को कंप्यूटर की आर्टीफीशियल लैंग्वेज बनाने के लिए उपयुक्त और सबसे सुरक्षित मान रहा है।

:) नासा वैदिक गणित के 16 सूत्रों और 13 उपसूत्रों के जरिए आर्टीफीशियल इंटेलिजेंस पर संधान कर रहा है।


:) आज से 2600 वर्ष पहले भी भारत में सफलता पूर्वक शल्य चिकित्सा की जाती थी। सुश्रुत को शल्य चिकित्सा का जनक कहा जाता है।

:) प्लास्टिक सर्जरी की शुरुआत प्राचीन भारत में हुई थी।

:) बच्चों के फेबरेट इंडोर खेल सांप सीढ़ी को 23वीं शताब्दी में भारतीय कवि संत नामदेव ने बनाया था। पहले इसे मोक्षपट कहा जाता था।

:) दुनिया में सर्वाधिक पोस्ट ऑफिस भारत में हैं।

:) दुनिया का सबसे बड़ा एप्लॉयर भारतीय रेलवे है, इसके 10 लाख से अधिक कर्मचारी हैं।


:) सबसे महत्वपूर्ण तथ्य-हमारे देश में गंगा-जमुनी प्रथा को जीवंत रखने के लिए आज भी लोग प्रयासरत है। भारतवर्ष में हिन्दू ही नहीं, मुस्लिम, सिख धरम को मानने वाले व्यक्ति राष्ट्रपति बने है। डा. अब्दुल कलाम, मनमोहन सिंह और सोमंनाथ चटर्जी क्रमश मुस्लिम, सिख और हिन्दू विचारधरा को मानने वाले राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा-स्पीकर रहे.. जय हिंद

Wednesday, July 29, 2009

यादों के झरोखों से

जिंदगी में आपका सामना किस के साथ हो जाये,
ये आप और हम नहीं जान पाते है..इनमे से कुछ मुलाकातें तो यादगार बन जाती है और उस व्यक्तित्व के बारे में रह-रह कर याद दिलाती हैं, ऐसी ही एक हस्ती से मेरी मुलाक़ात अनायास हुई थी, मैं उनकी सुन्दरता और मुस्कराहट पे अभिभूत थी. .. जिसे हम सभी ने एक सुंदर जीवित प्रतिमा के रूप में देखा था कभी,
एक लम्हा वो भी आया उस सुन्दर काया को पञ्च-तत्व में विलीन करता गया
आग की दहकती लपटों को मैंने गाते हुए महसूस किया -एक दिन वो आएगा माटी के मोल..जग में रह जायेंगे प्यारे तेरे बोल...ये गीत कितना सच है . दुनिया में कुछ भी नहीं रहता है, रह जाते हैं तो सिर्फ आपके मीठे बोल ...

इस गाने के शब्दों में कितनी सच्ची बात है कि हम
और आपको एक दिन इसी माटी में मिल जाना है.. पर कौन सोचता है. हम तो अपनी जवानी को अपनों के बीच काट लेते है और बुढापे को एकेले के साथ बिताने को मजबूर होते है, चाहे अरबों कि जागीर क्यों न हो पास.. महारानी गायत्री देवी भी इसके अपवाद नहीं रही

आएये में ले चलूँ आपको मेरे यादों के झरोखों में जहाँ जयपुर की पूर्व राजमाता से मेरी मुलाकातें हुई थी ...
दो बार मुलाकात हुई, दोनों ही संक्षिप्त, क्योंकि दोनों ही बार मैं अपने असाइनमेंट पर थी। एक मुलाकात कोलकाता में हुई थी, जहां मुझे दैनिक विश्वमित्र ने सेलिब्रिटी रिपोर्टर बनाकर भेज दिया था।
मुझे त्रिपुरा के पूर्व महाराजा की बेटी की गुपचुप शादी को कवर करना था। गनीमत है कि उस दिन मेरा मूवी देखने का प्लान था। जब चीफ रिपोर्टर प्रदीप शुक्ला का फोन आया और उन्होंने इतना ही कहा था कि तुम हो कहां? मैंने बड़े निश्छल भाव से कहा-हाजरा रोड में हूं। बस प्रदीप भाई बोले-इमिडिएटली त्रिपुरा हाउस जाओ..मैने खींझ कर कहा-पर क्यों?प्रदीप जी-वहां एक शादी है, मीडिया को एंट्री नहीं है, आप को सेलिब्रिटी न्यूज को मसौदा रेडीहै। खैर, मैंने जैसे-तैसे अपने फ्रैंड को मनायाकरना और सीधे त्रिपुराभवन(प्रोमतेष बरुआ सरणी) जा पहुंची। मुझे इतना भान था कि यहां किले की तरह घेरा-बंदी होगी ..



मेरे पास लैटर-पैड था, छोटी वाली कलम(फेवरेट) इतेफ्फाक से मैंने उसी दिन रिकॉर्डर खरीदा था, जो पर्स में था।
अब बारी आई कि एंट्री कैसे
लूं हाउस में...खैर दिमाग की बत्ती ने साथ दिया और फूलवाली बन कर मैने हाउस मेंएंट्री पा ली..फिर शुरू हुआ खोज-बीन का दौर..किसी को पहचानती नहीं थी। मुझे कभी भी राजे-रजवाडों की जीवनी पढने में रूचि नहीं रही है. इवेंट कवर करने पे लग रहा था काश ये सारे चेहरे मेरे परिचित होते
जिधर नज़र घूमती वही झलकते जाम दिख जाते, धुयाँ से लबरेज गॉसिप करती सुंदर सुंदर महिलायों का हुजूम नज़र आता ..और कहीं पे तो नवाबी ठाठ दिखाते गोरे-गोरे चिट्टे-चिट्टे पूर्व महाराजा बाते करते नज़र आते .....मैंने अपना काम जारी... बीच बीच में लज़ीज़ पकवानों की खेरियत भी ले आती , करीब ती घंटों में रिकॉर्ड में फ्रंट पेजस्टोरी का मसौदा इकट्ठा हो गया, तब तक शाम भी घिर आई..मैं बस निकले को ही थी, देखा एक्ट्रेस मुनमुन सेन, भरत देववर्मन( महारानी गायत्री देवी की बहन के बेटे) और रिया सेन किसी से हंस-हंस कर बात करते दिखे..मुझे एक बार तो लगा कि चेहरा जाना पहचाना है, पर कहां देखा ये बात याद नहीं रही थी
सहसा याद आया पापा की स्क्रैप बुक में एक खूबसूरत महिला की फोटो-कलेक्शन में से कुछ मेल खाती है। माइ गॉड! ये तो गायत्री देवी है- चार्मिंग प्रिंसेज... मैं तो उनकी बातों को सुनने के साथ कहां खो गई..ध्यान ही रहा..मुनमुनदी क्रिमसन रैड साड़ी में थी और पूर्व
राजमाता ऑफ जयपुर लाइट ब्लू साड़ी, उनके गले में पर्ल नैकलेस था और चेहरे पर अद्भुत मुस्कान।

वे इस कदर घिरी थी अन्य रियासतों के लोगों से कि मुझे उन तक पहुंचने
का मौका नहीं मिल रहा था, दूसरी वीडियो-रिकॉडिग वाले बार-बार लाइट इस तरह फोकस कर रहे थे कि मेरी आंखें चुधिया रही थी।...पर मैंने अवसर निकाल ही लिया और पूर्व राजमाता गायत्री देवी से बहुत ही संक्षिप्त मुलाकात की..मैं उनके सौन्दर्य से अभिभूत थी... लेकिन उनकी आंखों ने मेरे एटिट्यूड से पहचान लिया था कि मैं कौन हूं। नाम बताने के बाद उन्होंने सहज रूप से पूछ लिया-सो यू आर हेयर फॉर सेलिब्रिटी न्यूज..मैं मुस्काराई ..और तभी मोबाइल घनघना उठा...ये मेरी पहली मुलाकात थी पूर्व राजमाता गायत्री देवी के साथ
सन 2004 में...दूसरी मुलाकात भी इसी तरह अनायास हुई, 2008 में वो भी उनके अपने शहर जयपुर में। मैं किसी काम से जवाहर कला केन्द्र गई थी, राजमाता वहां आर्ट इनागोरेशन के लिए आई थीं। फर्क इतना था कि वे इस बार व्हील चेयर पर थी, मीडिया की भीड़ के हुजूम में थी, फिर भी उन्होंने मुझे पहचान लिया था। मैं उनकी स्थिति को देखकर शॉक्ड थी..उनकी मुस्कुराहट का उत्तर भी दे पाई थी।

मैंने उनकी स्थिति से यही जाना-आपको प्रकृति ने कितना ही सुंदर क्यों बनाया हो, पर समय के साथ-साथ शरीर जीर्ण होता जाता है।
मात्र चार सालों में गायत्री देवी की चार्म में तो चेहरे पर दिख रही थी, पर आंखों में कुछ और ही बात थी..बेबसी. एकाकीपन.. उस सुंदर-प्रतिमा का एक पुजारी हमारे घर में है और वो हैं मेरे पापा। या यूं कहूं कि पापा उनके बहुत बड़े फैन
थे। उनके बारे में किसी भी नेशनल-इंटरनेशनल मैग्जीन में कुछ भी छपता, वे उसे बड़े चाव से पढ़ते थे और उनआर्टिकल को सहेज कर रखते थे।

1967 की बात है। कोलकाता टर्फ क्लब (रेस कोर्स) में इंविटेशन कप हो रहा था और पापा अपने प्रिय घोड़े midnight cowboy पर दाव लगाने गए थे। इस घोड़े ने कई बड़े कप जीते थे। ये घोड़ा भी महारानी गायत्री देवी की नैहर से संबंधित था। महाराजा नारायन ऑफ कूचबिहार के ऐसे कई घोड़े थे, जिन्होंने रेस में धूम मचाई, midnight cow
boy´ उनमें से एक था। यही उन्होंने पहली बार महारानी गायत्री देवी को महारानी जीना नारायन ऑफ कूचबिहार के साथ देखा था। जीना रानी एक स्कॉटिश महिला
थी, उनका भाई रिकाबी कूचबिहार महाराजा के रस के घोडों का जोकी था.. रिकाबी ने ही पापा का परिचय गायत्री देवी से कराया था गायत्री देवी ने उस दिन नीले रंग की साड़ी पहनी थी। दुनिया की सबसे खूबसूरत महिलाओं में से शुमार के लिए पापा बस इतना ही कहते हैं- She was God sent कुछ लोग अलौकिक व्यक्तित्व के धनी होते हैं। संसार में आते हैं, बड़े कामों को अंजाम देते हैं और दुनिया उन्हें आइकॉन की तरह पूजती है, पर एक दिन नियत समय पर अपने बेशुमार दौलत और अकेलेपन को छोड़ कर सदा-सदा के लिए पंच-तत्व में विलीन हो जाते हैं। पूर्व राजमाता गायत्री देवी का जीवन भी कुछ ऐसा रहा। शी लिव्ड लाइक किंग।

वो बेमिशाल थीं, अद्वितीय रहीं और यादों के झरोखों में रहेंगी एक खूबसूरत इतिहास बनकर

गीत कितना सच है . दुनिया में कुछ भी नहीं रहता है, रह जाते हैं तो सिर्फ आपके मीठे बोल ...