Sunday, May 8, 2011

माँ


माँ स्नेह का अल्हड़ जलप्रपात हैं
माँ कभी निष्ठुर प्रस्तर समान हैं
माँ 'सोमाद्रि' के जीवन का संगीत हैं
माँ नाद में विराजमान शक्ति-पीठ हैं

संसार क़ी रचयिता माँ-शक्ति को समर्पित

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माँ हो सकता है मैं तुम सा ना बन पाऊं,
तुम कोई शिकायत ना करना ,
पर जब भी पास आऊं
मुझे गले से जरुर लगा लेना ,
बाहर बहुत झंझावात है
और अंदर कई द्वन्द हैं
लेकिन तेरी ममता के आँचल तले
सारे ना जाने कैसे हो जाते बंद हैं
शक्ति क़ी प्रतिनिधि जननी-माँ को समर्पित

2 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

भावमयी।

Mahendra Yadav said...

Very beautiful..
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महेंद्र
http://thirdfrontindia.blogspot.com