Sunday, May 8, 2011

माँ


माँ स्नेह का अल्हड़ जलप्रपात हैं
माँ कभी निष्ठुर प्रस्तर समान हैं
माँ 'सोमाद्रि' के जीवन का संगीत हैं
माँ नाद में विराजमान शक्ति-पीठ हैं

संसार क़ी रचयिता माँ-शक्ति को समर्पित

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माँ हो सकता है मैं तुम सा ना बन पाऊं,
तुम कोई शिकायत ना करना ,
पर जब भी पास आऊं
मुझे गले से जरुर लगा लेना ,
बाहर बहुत झंझावात है
और अंदर कई द्वन्द हैं
लेकिन तेरी ममता के आँचल तले
सारे ना जाने कैसे हो जाते बंद हैं
शक्ति क़ी प्रतिनिधि जननी-माँ को समर्पित

Thursday, May 5, 2011

अब्दुला दीवाना

बहुत दिन बीते
मैं नींद में खोई थी
ना जागी थी और ना मैं सोई थी
कितनों को देखा मैंने,
पलकों के अधर तले
पर ना पाया मैंने अपने जो संग चले
बहुत दिन बीते
मैं खील-खील हो रोई थी
न जाने किस बगिया में सोई थी



दिन बीते रात बीते
हवाओं के साथ रीते
कोपलें फूट चुकी कब क़ी
न जाने क्यों मैं खोई थी
तंद्रा थी ऐसी जो
मुझे कुरेदती गई
आसमां से जमीं तक टोहती रही
लेकर क्या है जाना,
सारा ·कुछ है बेगाना
उसके इस शहर में तुम भी हो
अब्दुला दीवाना
बहुत दिन बीते
मैं नींद में ही खोई थी
पर थोड़ी-थोड़ी जागी थी और
थोड़ी-थोड़ी सोई थी....