Friday, October 1, 2010

यूही उन्हें महानायक नहीं कहा जाता....




कुछ बात तो है.. वरना उन्हें लोग महानायक क्यों कहेंगे। मैं यहां बात कर रही हूं द लेजेंड अमिताभ बच्चन की। इस बार ऑफिस के सिलसिले में मुंबई जाना पड़ा, वैसे मुझे भेजा इसीलिए गया था ताकि करोड़पति बनने के गुर सीख कर लौट सकूं। जब सिखाने वाले स्वयं बिग बी होंं, तो मुर्दा भी इंकार कैसे कर सकता है, फिर मैं तो जीवित हूं। ये उनसे मेरी तीसरी मुलाकात थी, पर इस मुलाकात ने मुझे समझाया कि सुपरस्टार जैसे घर में दिखते हैं, पहते हैं और अपने दायित्व के लिए सतर्क हैं, वैसे ही वे स्टेज पर होते हैं।
कौन बनेगा करोड़पति २०१० की लॉन्ंिचंग का कार्यक्रम मुंबई के जे डब्यू मैरियट में रखा गया था और जैसा कि हर बार होता है.. बिग बी के प्रवेश पर पत्रकार भी सीटियों और तालियां से स्वागत करते हैं और दूसरी ओर से आवाज आती है.... नमस्कार मेरा नाम अमिताभ बच्चन है....हाउ स्वीट ना....
गौर करने की बात है कि उनके नाम से हर कोई परिचित है फिर भी वे अपनी परिचय मुस्कुराते हुए, हाथ जोड़कर देते हैं,.. यकीन नहीं होता, जो करोडो़ं लोगों के दिलों में राज करता है, उसे परिचय देने की क्या जरूरत? पर बिग बी का यह स्टाइल है...वे रिन्यू कर देते हैं अपने चाहने वालों के कोटर, जहां वे विराजते हैं... कि मैं वहीं हूं, जिसे आप के दुलार ने महानायक बनाया है।

ये शुरुआती मिसाल है, पर जब वे स्टेज से जाते हैं, तो भी कुछ ऐसा कर जाते हैं, जो आपके दिल पर गहरी छाप छोड़ दे...।
कार्यक्रम में अमिताभ ने कौन बनेगा करोड़पति २०१० की बुक का अनावरण भी किया (चित्र देखें) इसके लिए उन्होंने किताब पर चढ़ा रैपर फाड़ा और नीचे की तरफ आहिस्ते से सरका दिया, इसे आप फैंकना नहीं कहेंगे...और जब प्रोग्राम खत्म किया, तो अपने फैंके हुए उसी रैपर को उन्होंने बिनी तक्कलुफ के उठाया और साथ ले गए, जबकि वहां आयाजकों के बिग हैंड्स भी थे, उन्होंने भी अपनी किताबों के रैफर फाड़ कर यूं ही स्टेज पर फैंके थे...।
बस एक छोटी सी अदा हम सबको सिखा गई कि स्वच्छता भगवान के सामिप्य ले जाती है... यानि cleanliness is next to godliness.
और महानायक आप तभी हो सकते हैं, जिसने भगवान को पाने के लिए अपने दायित्व ईमानदारी से निभाए हो...

3 comments:

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

सोमाद्रि जी, इस पोस्ट के लिये नहीं, बल्कि गुप्त जी के गांधी जी के सम्बन्ध में एक लेख पर लिखी आपकी टिप्पणी का उत्तर दे रहा हूं. कडुवाहट नहीं सत्य है.. मैं भी गांधी जी का बड़ा प्रशंसक हूं लेकिन सत्य से मुख मोड़ना भी अपराध ही है.. आजादी मिलना उनके बिना सम्भव नहीं था, लेकिन जो चीजें इतिहास में दर्ज हैं उनसे मुंह कैसे मोड़ा जा सकता है.. हो सकता है आने वाले समय में बच्चा अपने बाप को पुकारने से पहले डीएनए टेस्ट की मांग कर दे. इतिहास से जो लोग सबक नहीं लेते इतिहास साक्षी है कि वे लोग सबक लेने लायक नहीं रहते. और शायद हम लोग कुछ दूसरी तरह ही के लोग हैं... कभी गौर से विचार कीजियेगा और इतिहास भी सन पन्द्रह सौ से प्रारम्भ नहीं होता...

Anonymous said...

bahut dino baad blog pe aapka punaruday hua, madam ji. badhai bid-b se mulaqat hui, kuch seekhne ko mila, wo aapne yahan likha,
-Kasturi

abhishek said...

वाकई आप सही कह रही हैं,, महानायक होने के लिए महानायकत्व का व्यक्तित्व में समावेश होना जरूरी है,,,,